...पर चलता है - मुस्कान शाह

by March 28, 2020 0 Comments
दिल टूटा है मेरा,
पर चलता है,
ज़ख्म गहरा हुआ है,
पर चलता है

उसने बीच राह में मुंह मोड़ लिया,
दिल तोड़ दिया,
साथ छोड़ दिया,
सब कुछ उसका होने के बाद भी,
उसने मेरे दिल को निचोड़ दिया,

उसने वादे लिए थे मुझसे कभी,
तेरा होके रहूंगा,
ना होगी कमी,
पर वो झूठा निकला यूं वादो की तरह,
गलती थी मेरी,
इसीलिए आंखों में थी नमी,

वो बेवफा निकला,
उसने बेवफाई की,
सब कुछ भुला कर,
उसने रुसवाई की,

मुझे दिखा कर वो सारे सपने कहानी के,
वो किस्से कुछ नए लिखता चला गया,
मुझे छोड़ कर अकेला राहों मै कहीं,
वो किसी और से मिलता चला गया,

यकीन नहीं हुआ था मुझे,
मेरी बेवकूफियों पर कभी,
पर आखों मै देखी उसकी करतूतें,
तब जाके यकीन आया था कहीं,

लोग कहते रहे तेरे साथ खेल हो रहा है,
पर मुझे लगा खुदा का संजोया कोई मेल हो रहा है,
मै बुनती रही सपने,
और सजाती रही ख्वाब,
मुझे कहा पता था,
ये सब महेज़ एक झूठा कच्चा महल हो रहा है,

अब समझ चुकी हूं,
और जान चुकी हूं मै,
मेरी तकदीर थी उस वक़्त तेरी,
ये मान चुकी हूं मै,

फिर लेकिन तेरे झूठे बेहकावे में नहीं आऊंगी,
कुछ भी हो अब मै संभल जाऊंगी,
सिख चुकी हूं मै बेवफाई का मतलब,
पर सच्चे इश्क़ की मिसाल मै बनकर दिखाऊंगी,
मिलेगा मुझे कोई,
जो तेरी तरह ना होगा,
वो सच्चा और सरल होगा,
और तेरी तरह मुझे ना डबोएगा।।

Creation by Muskan Shah
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Aman Prithviraj

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