रेहेने भी दो अब - सायली वाड़के

by March 28, 2020 1 Comments

दोस्ती से दिल तक का और प्यार से धडकन तक का सफर बखूबि निभाया तुमने ।
अपना बनाकर , दिल में बसाकर , भुला क्यों दिया फिर तुमने ? 

लगता है जैसे कुछ पल की ही तो बात थी , कुर्बत दोनो की जैसे खुशियोकी बारात थी ।
रेहेने भी दो अब , मत सफाई देना ,खत्म हुआ सब बीत चली रैना । 

बड़ी आसानीसे आगे बढ़ गए तुम , जैसे कुछ हुआ ही नही।
चल दिए इस कदर , की तुम्हारे हातो दिल मेरा कभी टूटा ही नही । 

गौर से सोचती हूँ , तो लगता है मुनासिब था तुम्हारा मुझे यू छोड़ कर जाना, 
प्यार के मेरे तुम हकदार थे ही नही , थे सिर्फ दिल बेहेलानेका बहाना। 

रेहेने भी दो अब , कुछ मत केहेना, ऐहेसास हो जाए बस यही तो है ना ।

Poetry By Sayali Wadke
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Aman Prithviraj

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