मेरा यार मौसम सा - नीलोफर फ़ारूकी तौसीफ़

by April 03, 2020 0 Comments
नज़रें चुरा कर , वो राहों से निकल रहा है
हाय! मेरा यार मौसम सा बदल रहा है।

बहारें आती थी कभी, जिनके आने से।
आज इश्क़ हमारा, खिजाओं मे पल रहा है।

बदल देता है तेवर अपना, हवाओं के रुख से,
कुछ इस तरह वो, हवाओं संग चल रहा है।

खुशनुमा होती थी महफ़िल, खिजाओं में कभी
पर आजकल वो बहारों, में भी फिसल रहा है।

बारिश की फुहार लिए, जो गुलिस्तां सजाता थ।
वही गुल आज नीलोफ़र, आग में जल रहा है।

Creation by Nilofar Farooqui Tauseef
Instagram Id - writernilofar

Aman Prithviraj

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